“डा. मोहन भागवत: शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवसाय नहीं, सबके लिए सुलभ हों”

“डा. मोहन भागवत: शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवसाय नहीं, सबके लिए सुलभ हों”

Education and health should be accessible to all

  1. शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकताएं हैं, व्यवसाय नहीं।

  2. भारत के पास वैश्विक समस्याओं का समाधान 'वसुधैव कुटुंबकम्' में।

  3. शोध देश को परम वैभवशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लखनऊ। 'शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकता है। यह व्यवसाय नहीं हो सकते। शिक्षा और स्वास्थ्य सबके लिए सुलभ होने चाहिए।' ये विचार सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद कार्यक्रम में रखे।

उन्होंने कहा, 'पश्चिम के लोगों ने शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया। हमारी शिक्षा व्यवस्था हटाकर अपनी थोपी। अंग्रेजों ने जो बिगाड़ा उसको ठीक करना होगा।' कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय, बीबीएयू सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के पीएचडी छात्र-छात्राएं शामिल रहे।

शोधार्थी संवाद में डा. मोहन भागवत ने कहा कि संघ का कार्य देश को परम वैभव सम्पन्न बनाना है। मैं और मेरा परिवार ही सब कुछ है, यह न सोच कर पूरे देश के लिए सोचना होगा। संघ को समझना है तो संघ के अंदर आकर कर देखिये।

सरसंघचालक ने कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है। सत्य परक बातें सामने आनी चाहिए। अज्ञानता से भारत को हम समझ ही नहीं पाएंगे। उन्होने शोधार्थियों से कहा कि जो भी शोध करें, उसे उत्कृष्ट रूप से, प्रामाणिकता पूर्वक, तन-मन-धन से, निःस्वार्थ भाव से देश के लिए करें। उन्होंने कहा कि संघ को लेकर बहुत दुष्प्रचार होता है। शोधार्थियों को सत्य सामने लाना चाहिए।

दुनिया भर की समस्याओं के प्रश्नों का जवाब भारत के पास

वैश्वीकरण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई बहुत बड़ी चुनौती नहीं है। आज वैश्वीकरण का मतलब बाजारीकरण से है, जो खतरनाक है। हम वसुधैव कुटुंबकम् की बात करते हैं। यानी पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हैं।

जब तक सब सुखी नहीं होंगे, एक व्यक्ति सुखी नहीं हो सकता है। इसलिए हमारा जीवन संयमित होना चाहिए न की उपभोगवादी। संयम, त्याग का जीवन हमारे संस्कृति आत्मबोध में है। पश्चिमी देशों ने जड़वाद फैलाया।

उन देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और बाकी को छोड़ दो, जो बाधक बने, उन्हें मिटा दो। यही काम आज अमेरिका, चीन कर रहे हैं। लेकिन आज दुनिया भर की समस्याओं के प्रश्नों का उत्तर भारत के पास है। विश्व गुरु बनना है तो सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा। दुनिया तभी मानती है जब सत्य के पीछे शक्ति हो।

संघ प्रमुख ने कहा कि पर्यावरण के प्रति हम लोगों को मित्र भाव से जीवन को जीना चाहिए । पेड़ लगाना, पानी बचाना, एकल प्लास्टिक का प्रयोग न करना जैसे कार्य पर्यावरण संरक्षण में सहायक हो सकते हैं। हमें आधुनिक तकनीक का भी पर्यावरण संरक्षण में उपयोग करना चाहिए।